पटना: बिहार पुलिस अब अपराध नियंत्रण और नशा तस्करी पर लगाम लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है. राज्य में बहुत जल्द ड्रोन पुलिसिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके तहत हर जिले में विशेष ड्रोन यूनिट गठित होगी. इस पहल से न केवल अपराधियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी, बल्कि दियारा क्षेत्रों, दुर्गम इलाकों और ट्रैफिक प्रबंधन में भी पुलिस को बड़ी मदद मिलेगी.
मार्च 2026 तक खरीदे जाएंगे 50 ड्रोन
अपर पुलिस महानिदेशक (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने जानकारी दी कि पुलिस मुख्यालय ने करीब 50 अत्याधुनिक ड्रोन खरीदने की योजना बनाई है. इस परियोजना पर लगभग 25 करोड़ रुपये खर्च होंगे. हर जिले को कम से कम एक ड्रोन दिया जाएगा, जबकि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को 10 हाई क्वालिटी ड्रोन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि संगठित अपराध, नक्सल गतिविधियों और बड़े आपराधिक मामलों पर सटीक कार्रवाई की जा सके.
उन्नत तकनीक से लैस होंगे ड्रोन
पुलिस विभाग द्वारा खरीदे जाने वाले ड्रोन आधुनिक कैमरों और सेंसर से लैस होंगे. ये ड्रोन लगभग 100 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेंगे और 10 किलोमीटर के दायरे में निगरानी कर पाएंगे. लगातार 45 मिनट तक उड़ान भरने की क्षमता वाले इन ड्रोन से वाहनों की नंबर प्लेट तक स्पष्ट रूप से पढ़ी जा सकेगी. इससे फरार अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो जाएगी.
दुर्गम इलाकों में बढ़ेगी पुलिस की पहुंच
दियारा और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना अब तक बड़ी चुनौती थी. ड्रोन तकनीक से ऐसे इलाकों में भी प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी. इसके साथ ही बड़े आयोजनों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और ट्रैफिक जाम की स्थिति में भी ड्रोन पुलिस के लिए आंख और कान का काम करेंगे.
एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया, “हर जिले को एक स्मॉल साइज ड्रोन दिया जाएगा जिसकी एयरबॉर्न क्षमता 45 मिनट होगी. कुल 40 ड्रोन जिलों को और 10 उन्नत ड्रोन एसटीएफ को मिलेंगे, जिससे अपराध नियंत्रण में बड़ी मदद मिलेगी.”
देश का पांचवां ड्रोन पुलिसिंग राज्य बनेगा बिहार
इस योजना के लागू होते ही बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल और तमिलनाडु के बाद ड्रोन पुलिसिंग शुरू करने वाला देश का पांचवां राज्य बन जाएगा. इसे आधुनिक और स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
फॉरेंसिक सिस्टम भी होगा मजबूत
पुलिस आधुनिकीकरण के तहत फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) को भी सशक्त किया जा रहा है. राज्य के सभी प्रमंडलों में एफएसएल के नए भवन बनकर तैयार हो चुके हैं. फिलहाल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया में लैब कार्यरत हैं, जिन्हें और उन्नत किया जा रहा है.